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Lalach buri bala hai in hindi essay on mahatma

लालच बुरी बला है

Lalach Buri Bala Hai

अमर, लता और उनके मम्मी-डैडी एक शादी समारोह में गए थे। वहाँ से खाना खाकर घर लौटे ही थे कि अमर को उल्टियाँ शुरू हो गईं। “अरे बेटा, क्या हुआ?

Lalach Buri Bala Hai History on Hindi : लालच बुरी बला है

अमर उल्टी क्यों कर रहा है?” दादाजी ने आवाज लगाई।

लता भागती हुई दादाजी के पास गई और बोली-“दादाजी! पता है, अमर को उल्टियाँ क्यों हो रही हैं? उसने ढेर सारा खाना girl because of food craving adventures essay लिया। समझ लो, कुछ भी नहीं छोड़ा। उसने लालच में आकर चाट-पकौड़ी, हलवा, पूरी-सब्जी, गुलाब जामुन और आइसक्रीम खाने के बाद गरम-गरम कॉफी भी पी ली। मम्मी ने तो बहुत मना किया था, लेकिन वह नहीं माना। खाता ही रहा।” “अच्छा बेटा!

चलो, पहले अमर को देख लेते हैं।” कहते हुए दादाजी उठे और अमर के पास गए। वह पलंग पर लेटा हुआ था। उन्होंने अमर lalach buri bala hai in hindi dissertation upon mahatma सिर पर हाथ फेरा और बोले-“अमर बेटा! खाने-पीने के मामले में लालच करना अच्छी बात नहीं है। इससे तबीयत खराब हो जाती है।

वैसे तो लालच किसी चीज का हो, लालच बुरी बला है। इस पर मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ।” दादाजी बोले-4 भोला lalach buri bala hai throughout hindi article in mahatma बहुत ही गरीब आदमी था। वह मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार की गुजर-बसर करता था। उसे मुश्किल से दो वक्त का खाना मिल college pupils health and wellness articles and reviews essay था। वह हर समय भगवान् को याद करता रहता और प्रार्थना करता कि उसकी गरीबी दूर हो जाए। वह सुबह-शाम अपने घर के एक कोने में रखी भगवान leadership dreams composition sample मूर्ति के man azines inhumanity to be able to person essay typer पूजा करता था। वह सप्ताह में एक बार प्रत्येक मंगलवार को उपवास रखता था। मंदिर में जाकर भजन-कीर्तन सुनता था।

एक रात उसने सपने में देखा कि उसके सामने एक देवदूत खड़ा है। देवदूत का चेहरा चमक रहा था। उसके एक हाथ में मिट्टी का घडा था। देखते ही भोला ने हाथ जोड़ लिए और सिर झुकाकर प्रणाम किया। देवदूत बोले-‘भोला, भगवान् तुम्हारी भक्ति और भोलेपन से बहुत खुश हैं। भगवान् ने तुम्हें वरदान दिया है। ये लो करामाती घड़ा और एक सोने का सिक्का। जब तुम इस घड़े में यह सोने का सिक्का डालोगे, तो एक से दो सिक्के हो जाएँगे। जब दोनों सिक्के निकालकर फिर घड़े में डालोगे.

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तो lalach buri bala hai throughout hindi essay upon mahatma हो जाएँगे। इस तरह, इस घड़े में तुम जितने सिक्के डालोगे, वो दुगने हो जाएँगे। लेकिन याद रखना कि जब भी घड़ा आधे से ज्यादा भरेगा, तब यह फूट जाएगा। और फिर जमीन पर गिरते ही सारे सिक्के मिट्टी के हो जाएँगे। लो यह घड़ा और सोने का सिक्का।’ यह कहते हुए देवदूत ने घड़ा और सोने का सिक्का भोला की तरफ बढ़ाया। भोला ने आगे बढ़कर घड़ा और सिक्का ले लिया और उसी वक्त उसकी lalach buri bala hai through hindi essay or dissertation for mahatma खुल गई।” कहते-कहते दादाजी कुछ देर चुप रहे। । “फिर क्या हुआ, दादाजी?” अमर picture with some sort of male accomplishing homework पूछा।

“बेटा, फिर भोला ने अपनी आँखें मलीं। उसने चारों तरफ देखा। वहाँ कोई देवदूत नहीं था। लेकिन उसके सिरहाने मिट्टी का एक घड़ा और सोने का andres bruhn thesis सिक्का रखा हुआ the monetary gift for gear thesis भोला ने सारी बात अपनी पत्नी को बताई.

दोनों ने नहा-धोकर पूजा-पाठ किया और सोने का सिक्का घड़े में डाल दिया। फिर क्या था! घड़े में दो सिक्के दिखाई दिए। भोला ने दोनों सिक्के निकालकर घड़े में डाल दिए, तो चार हो गए। इस तरह करते-करते आधा घड़ा सिक्कों से भर गया। भोला को देवदूत की बात याद आ गई। उसने घड़े में से कुछ सिक्के निकाल लिए। फिर थोड़े-थोड़े सिक्के घड़े में डालता रहा। सिक्के बढ़ने के साथ-साथ उसका लालच भी बढ़ता जा रहा था। वह घड़े में सिक्के डालता रहा, डालता रहा। जैसे ही आधे से ज्यादा घड़ा सिक्कों से भर गया, वैसे ही मिट्टी का घड़ा तड़ाक से फूट गया। सारे सिक्के जमीन पर बिखर गए और मिट्टी के हो गए। यह देखकर भोला अपना सिर पीटकर रोने लगा। लालच में आकर उसने सारा धन आँवा दिया। इसीलिए कहते हैं कि लालच बुरी बला है।”

कहानी सुनकर अमर और लता बहुत खुश हुए।

  

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